२३ औँ राष्ट्रिय धान दिवस तथा रोपाइँ महोत्सव: एक संक्षिप्त विवरण
काठमाडौँ, असार १५ गते । नेपाल सरकारले विगत २३ वर्षदेखि हरेक वर्ष असार १५ गतेलाई राष्ट्रिय धान दिवस तथा रोपाइँ महोत्सवका रूपमा मनाउँदै आएको छ। यस वर्षको मूल नारा ‘जलवायुमैत्री प्रविधि, धानमा आत्मनिर्भरता र समृद्धि’ रहेको छ।
यो वर्ष पर्याप्त पानी नपरेका कारण गत वर्षको तुलनामा धान रोपाइँको दर केही न्यून देखिएको छ। कृषि विभागको असार १२ गतेसम्मको तथ्याङ्क अनुसार मुलुकभर कुल धान उपलब्ध क्षेत्रफलको ११.३३ प्रतिशत (१,५६,५८३ हेक्टर) मात्र रोपाइँ सम्पन्न भएको छ, जबकि गत वर्ष यसै अवधिमा १५.६ प्रतिशत रोपाइँ भइसकेको थियो।


प्रदेशगत धान रोपाइँको अवस्था (असार १२ सम्म)
विभिन्न प्रदेशहरूमा भएको धान रोपाइँको विवरणलाई तलको तालिकामा प्रस्तुत गरिएको छ:
| क्र.सं. | प्रदेशको नाम | रोपाइँ प्रतिशत | रोपाइँ भएको क्षेत्रफल (हेक्टर) |
| १ | कर्णाली प्रदेश (सबैभन्दा बढी) | २२.८% | ९,८७५ |
| २ | लुम्बिनी प्रदेश | २०.९% | ६२,६७१ |
| ३ | गण्डकी प्रदेश | १२.७% | ११,८४६ |
| ४ | बागमती प्रदेश | १२.६% | १४,४२० |
| ५ | सुदूरपश्चिम प्रदेश | ९.३% | १५,८०० |
| ६ | कोशी प्रदेश | ८.३% | २२,८१५ |
| ७ | मधेश प्रदेश (सबैभन्दा कम) | ५.०% | १९,१५८ |


नोट: नेपालभर कुल १३ लाख ८१ हजार ४८८ हेक्टर क्षेत्रफलमा धान खेती हुने गर्दछ। यो वर्ष समयमै मनसुन सक्रिय नहुँदा कृषकहरूले रोपाइँमा केही ढिलाइ भोग्नुपरेको छ।
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